सिर और मुंह
ढांप गमछे में
चलाते हैं
मोटर साईकिल आज जो युवा
इस सुहावने
मौसम में भी
कुछ तो छुपाते
होंगे वे हमसे
सरकार से
मांगने वाले पारदर्शिता आफिस के कर्मचारियों की
को न दिखते
मुंह ढांपे ड्राइवर ...
यह सब तो
देखना पुलिस का काम है ...
ये कैसी जीवन
शैली है ?
इतना तो
निश्चित है
हमारा भविष्य
असहिष्णु हो रहा है
चलना जिन्दगी
है
पर कैसे चलें
यह भी तो
चिन्तन जरूरी है |
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