पिता
और पति की धूरी पर घूमती
स्त्री की
जिन्दगी
प्रतिफल पाती
औरत
पिता व पति
के कर्मों का
जग से हारी
औरत
गले
लगा अग्नि को पूजनीय बन जाती
शाश्वत सत्य
है ये कथा तेरी
ओ
पुत्रवती ! नमन करूं मै तुझे
हो विकल मैं
चली ढूंढने
अब पुत्री की माँ |
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