प्रतिभावान
लडकियां दिखती है कालेजों में
घरों में
क्यों नहीं भला
आफिस में
क्यों नगण्य हो जाती हैं
सड़क पर तो मूक
बन जाती हैं
मात्र मादा
दिखने लगती हैं
प्रतिभा का
बीज छोड़ आती हैं शायद लडकियां
अपने कालेज के
मैदान में
और कालेज
हमारे जेहन में स्मरणीय बीज सा सोया रहता है |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें