बुधवार, 1 अप्रैल 2026

घर ही जीवन है ।


 

 

 

हर घर में कोई न कोई रहता है

 

मां, बहन , भाभी , मौसी , बुआ , भांजी , भतीजी

 

हर घर पुकारता है

 

थके यात्री को

 

रिश्तों को

 

पुरुष रिश्तों को .....

 

मकान में घर है

 

और घर में मिठास है ।

 

गरीब वर्ग  अपना मकान अपनी पत्नी के नाम कर जाता है

 

स्त्री है तो घर है ।

 

 

 

 

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