मंगलवार, 3 मार्च 2026

प्रार्थना


 

 

नसीब की बेटी हैं बच्चियां

 

जिनकी मां गुलाम है

 

कितना भी कर ले मां

 

विभिन्न रूप धर पुरुष शोषण करता है उसका

 

कभी अपने शारीरिक सु के लिए खेलता है  उससे

 

तो कभी मां मानमर्दन के लिए  धमकाता है उसे

 

अपनी मित्र मंडली में परोसता है उसे

 

अच्छान छोड़ जाता है एक दिन वह उसे समय से जूझने

 

बच्चियों

 

तुझमें मुझे मेरी खुशी कैद है

 

तू मां है

 

मैने तुझे मांनने मौकादिया

 

 

मै गुनहगार हू तेरी

 

मै तुझे दुनिया में लाई

 

पर जीने का मौका न दे पाई

 

मुझ पर ईश्वर का वज्र गिरे यही प्रार्थना है मेरी ।

 

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