My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
बच्चे थे
गणतंत्र दिवस था
वह स्कूल यूनिफार्म पहने बच्चों को सूर्योदय से पहले स्कूल बस में बैठाने निकलती थी
अब बच्चे बड़े हो गए हैं
विदेश में रहते हैं
खूब कमा रहे हैं….....
आज घर चुप हैं
ठंडा है
चाय पीनी पड़ेगी
वह रसोई में चल दी ।
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