रविवार, 28 जून 2026

लड़कियां और मकान




मध्यवर्ग में 

मकान मिले बेटे को

लड़कियां ब्याही जाती हैं मकान धारी बेटों से

जिनका ब्याह न होय वो भाग जातीं हैं घर छोड़ कर

लड़कियों का मकान नहीं होता 

हर घर में परमानेंट सेविका है

उनकी तनख्वाह उनके निकटस्थ ले जाते हैं 

सेविका बन किसी के घर में जी लेने  की नियति है उनकी ।

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