रविवार, 24 मई 2026

बीते कल की याद



वे भी दिन थे 

एक पल की खुशी के सहारे जीवन बीत जाता था 

बड़े खुले घर थे 

पांच किलो चावल का जमाना न था 

सुख दुःख सांझे थे

गीतों के संग जीते थे

सूरज देवता और दयू का सहारा था

संतुष्टि थी 

शहर विदेश था 

अंग्रेजों से त्रस्त थे 

आकांक्षा कम थी 

हम खुश थे ।


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