एपिस्टिन फाइल खुल रही थी
ईश्वर गायब था
बच्चियां मर रहीं थीं
पका कर खाई जा रहीं थी
अबोध लड़कियां गायब हो रहीं थीं
किसी अखबार ने खबर छापा था
एक बलात्कार की भुक्तभोगी ने लिखी थी आत्मकथा
माहौल में सनसनी थी
सोया मुद्दा गरमाया
बालिका संरक्षण गृह क्यों बनता है
घर में अपनों के पास बालिकाऐं सुरक्षित नहीं हैं क्या ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें