08 August 2015
21:51
-इंदु बाला सिंह
वन
धरती की शान है
पखेरुओं का आश्रय स्थल है ......
वृक्ष न कांटे हम
ये
आदिवासियों का इतिहास है
हमारे पूर्वजों का इतिहास है
मौसम रूठ जायेगा
आदिम जातियां लुप्त हो जायेंगी .................
बंजर मन भटकेगा कंक्रीट के स्मार्ट शहर में
और
एक दिन
गुम जायेंगी
हमारी सांसे भी |
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