सोमवार, 10 अगस्त 2015

हरी हरी चूड़ियां


11 August 2015
12:03

-इंदु बाला सिंह


हरी हरी चूड़ियां पहन के
सुबह सुबह मन्दिर जा रहीं हैं पड़ोस की औरतें
दादी के मुंह से अनायास निकल पड़ा .........
पिता मौन रहे |
कलप गया पोता ........
काश !
पिता के मुंह से निकलता .....
तुम भी पहनो
हरी हरी चूड़ियां
किसीने 
तुम्हें रोका है क्या  |

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