11 August
2015
12:03
-इंदु बाला
सिंह
हरी
हरी चूड़ियां पहन के
सुबह सुबह
मन्दिर जा रहीं हैं पड़ोस की औरतें
दादी के मुंह
से अनायास निकल पड़ा .........
पिता मौन रहे
|
कलप गया पोता
........
काश !
पिता के मुंह
से निकलता .....
तुम भी पहनो
हरी हरी
चूड़ियां
किसीने तुम्हें रोका है क्या |
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