16 August
2015
22:58
-इंदु बाला
सिंह
मंगनी
का टी शर्ट और जींस पहन के
सड़क पे चहकती
है ........दौड़ती है
स्कूटी नहीं
है तो ........क्या गम है
मस्त है
...खुश है
कामवाली की
अठरह वर्षीय बेटी ........
वह बन गयी है
मालिक की
बिटिया सरीखी
यह कैसी
प्रगतिशीलता है !
कौन समझावे
उस कामवाली को
........
जो समझावे उसे
वही दुश्मन
कहलावे ........
यह अजीब सा
उत्थान हो रहा
निम्न वर्ग का
|
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें