बुधवार, 13 नवंबर 2013

निरुत्तर है पुरुष

आरक्षण दिया जाय
पैतृक संपत्ति में हक दिया जाय
पर क्या लडकियों के विचार में
परिवर्तन ला सकते हैं हम
उसके मन में पारिवारिक जिम्मेवारी की भावना
पनपा सकते हैं हम कभी
यह एक सोचनीय विचार है
हर लड़की देखती है
घर में रहा जा सकता है सुरक्षित
पैसे कमाने की चिंता से मुक्त
ठाट से वह झकझोरती  है 
वह सामजिक व्यवस्था का दुहाई दे पति को .....
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खिला नहीं सकते थे तो ब्याह क्यों किया ?....
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पढ़ी लिखी महिलाएं के मुंह से  ऐसे वाक्य निकल कर
मारते हैं तमाचा
हमारा प्रगतिवादी सवर्ण पुरुष
सारे आरक्षणों को लाँघ ऊँचाई पर पहुंचने के बाद
रह जाता है निरुत्तर

एक पल को |

मिट्टी का दिया

मिट्टी का दीया हूं
मंदिर में  जलता
घर में जलता
स्वजन  की याद में जलता
जहां तेल बाती डाल कर जलाते मुझे तुम
वहीं मै जलता
राह दिखता
आशा का दीप प्रज्ज्वलित करता
सबका प्रिय हूं मै
पर मुझे  प्रिय है मेरा सर्जक
मेरा अपना कुम्हार
जिसका घर है आज दीवाली में भी अँधेरा
क्योंकि तुमने समय पर न लौटाये
उसके रूपये उधार |

गुरुवार, 7 नवंबर 2013

वर्तमान और स्वप्न

सपने देखने
और सपने जीने में बहुत फर्क है
सपने तो मृत्यु पर्यन्त हम देखते हैं
पर जी पाते हैं सदा हम
अपने वर्तमान में ही
हमारे हाथ से हमारा वर्तमान
धीरे से कब  बन जाता है हमारा भूत
हम जान  ही नहीं पाते
हम बस ठगे से उसे देखते रह जाते हैं
समय बस फिसलता रहता है
कितना भी कस कर क्यों न बांध लें  हम अपनी मुट्ठी |

पुरुषार्थ तो करना होगा

आसान होता है जी लेना
हंस लेना रो लेना
मार खा लेना
दोष दे देना दैव को
लड़की के लिए
पर वह  कैसी जननी बन रही हैं !
कैसे नागरिक बना रहे हैं अपनी औलाद को पुरुष आज !
माता पिता की गुमी आवाज होती  है संतान
परिवर्तन तो लाना ही होगा
भाग्य की औलाद न बन के
अब  तो पुरुषार्थ करना  ही होगा
युवक व युवतियों को
नाकामियों व गरीबी की वसीयत को ठुकराना ही होगा
छल का जवाब कर्म से देना होगा |

मंगलवार, 5 नवंबर 2013

मकान तो जरूरी है

मकान जरूरी है
ब्याह कैसे होगा लड़के का
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कोई बात नहीं
हम अपनी लड़की के नाम से खरीद देंगे एक घर
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सरकारी नौकरी में है लड़का
सरकारी क्वाटर  तो मिलेगा न
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तो क्या परिवार भी भटकेगा शहर शहर , गांव गांव
बच्चों की पढाई कैसे होगी
कितने समझदार हैं माता पिता
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लड़की आज सपना देखती है
अपना मकान बनाने का
आखिर कौन सा मकान उसका है ?
एक पति का है तो दूसरा पिता का
ब्याह कर लेगी तो तनख्वाह का हिसाब पति रखेगा
बच्चे कौन सम्हालेगा ?
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इस मकान के झगड़े में घर खो गया
ननद भाभी , ससुर समधी , सास समधिन
चाचा मामा , चाची मामी .....सब गुम गये 
सब रिश्ते कहानी के पात्र बन गये
जब एक छोटे मकान में बसता था घर
चूल्हे अलग थे
पर साँझा था सुख दुःख तीज त्यौहार
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हम प्रगति कर रहे हैं
मकान बना रहे हैं |


  



सोमवार, 4 नवंबर 2013

बोतल मैय्या

जेब में रुपैय्या
घर से दूर
काम का तनाव
सीनियर्स का मार्गदर्शन
इक्के दुक्के ढूंढने से मिलेंगे
जिसने शराब न छूई हो
युवतियां तो बच भी जाती हैं
सीनियर्स की पत्नियों से मित्रता कर
पर युवक पार्टी में अकेला बैठा कोल्डड्रिंक की चुस्की लेता हुआ
चावल में पड़ा कंकर सा दिखाई देने लगता है
मौके की तलाश रहती है
उसकी गलतियां खोजी जाती हैं
फिर शिकायतें ....
बिना प्रोमोशन के ट्रांसफर
सुदूर इलाके में पोस्टिंग
कितना मुश्किल होता है जीना
नौकरी करना सगों से दूर
बच के चलना
बोतल मैय्या के इंद्रजाल से |

रविवार, 3 नवंबर 2013

कर देंगे तेरा विसर्जन

प्यारी माँ !
माटी की मूरत माँ
लक्ष्मी स्वरूपा है तू
ओ मेरी माँ !
ऐसी ही खूबसूरत रहना तू
हर रिश्तों के चढ़ावों के हकदार हम पुत्र
इतना तो समझ ही गयी तू
तेरे सजीव बनते ही
कर देंगे हम तेरा विसर्जन माँ |