#इन्दु_बाला_सिंह
गांव में
बिस्तर पर पड़े दादा ने
पास फटकने न दिया मुझे
पुण्य कमाने का साधन थी उनके बेटे का मैं
बिस्तर पर पड़े बी मौखिक गणित का जोड़ घटाव करवाते थे
अपने पोते का
मेरे ताऊ के बेटे को
अपने वंशधारी को
आक्रोश जो जन्मा तो जन्मा
गणित न भाया कभी मुझे
पर
न जाने कैसे
मेरी प्यारी बिटिया बनी
अध्यापिका गणित की
सदा उत्सुक रही वह गणित में रिसर्च करने को ।
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