-इंदु बाला सिंह
लड़ाई है यह ...
पहचान की
नाम की
अहसान की
अस्तित्व की
हक की
आत्मसम्मान की
एक बेटी की लड़ाई है यह ..
उसके बुरे समय से
उस के वजूद की ....
हर लड़ाई आदमी अकेले ही लड़ता है
बाकी सब तो दर्शक हैं
वे अपने मनचाहे , मनभावन दृश्य के अनुसार ताली बजाते है ....
निकटस्थ लोग अपना मनोरंजन करते है ।
पहचान की
नाम की
अहसान की
अस्तित्व की
हक की
आत्मसम्मान की
एक बेटी की लड़ाई है यह ..
उसके बुरे समय से
उस के वजूद की ....
हर लड़ाई आदमी अकेले ही लड़ता है
बाकी सब तो दर्शक हैं
वे अपने मनचाहे , मनभावन दृश्य के अनुसार ताली बजाते है ....
निकटस्थ लोग अपना मनोरंजन करते है ।
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