Thursday, February 01, 2018
9:45 AM
9:45 AM
-इंदु बाला सिंह
अपनों को माफ़ करते वक्त पत्थर बन जाता है कलेजा
और फिर रसधार नहीं फूटती
उस अपने के लिये ...
पर किसी न किसी मौसम में रसधार तो फूटेगी जरूर .....
आखिर अपने ही तो हैं वे .....
अपनों के उपहार हैं ....वे रिश्ते |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें