शुक्रवार, 30 मार्च 2018

उपहार हैं वें .... रिश्तेदार हैं वे |


Thursday, February 01, 2018
9:45 AM
-इंदु बाला सिंह

अपनों को माफ़ करते वक्त पत्थर बन जाता है कलेजा
और फिर रसधार नहीं फूटती
उस अपने के लिये ...
पर किसी न किसी मौसम में रसधार तो फूटेगी जरूर .....
आखिर अपने ही तो हैं वे .....
अपनों के उपहार हैं ....वे रिश्ते |

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