-इंदु बाला सिंह
जिंदगी शतरंज है ...
इसमें
पैसेवाले जीतते हैं ...
गरीब मिटते हैं
मध्यम वर्गीय अपने डैनों में अपने परिवार छिपाये रखते हैं ...
बाकी अनाथ किसी के जीने का माध्यम बन जाते हैं ।
वर्गभेद न हो
तो जीने का माध्यम ही न हो ....
कहानियां कैसे बनें ..
हम वर्गभेद बनाये रखते हैं ....
शतरंज का खेल खेलते रहते हैं ।
इसमें
पैसेवाले जीतते हैं ...
गरीब मिटते हैं
मध्यम वर्गीय अपने डैनों में अपने परिवार छिपाये रखते हैं ...
बाकी अनाथ किसी के जीने का माध्यम बन जाते हैं ।
वर्गभेद न हो
तो जीने का माध्यम ही न हो ....
कहानियां कैसे बनें ..
हम वर्गभेद बनाये रखते हैं ....
शतरंज का खेल खेलते रहते हैं ।
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