My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी,
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मंगलवार, 5 जुलाई 2016
वह भूखी है
- इंदु बाला सिंह
खा के धोखे
सो गई अंतरात्मा ....... युवती की .....
अब .... दिग्भ्रमित है वह .....
मिटाये न मिट रही है उसकी भूख .....
उसके सम्मान की सूखी रोटी
हर बार झपट ले जाते हैं ........ लार टपकाते कुत्तों के झुंड |
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