कितनी दूर से
आती थी वो कामवाली |
मालिक के घर के बच्चे
उसे दादी कहते थे |
पच्चासी डिग्री में झुका उसका
सफ़ेद कपड़ों में नंगे पैर चलता शरीर भर था |
बहुत दिनों से न दिखी वो
आज मैंने पूछ ही लिया उसकी सहेली से |
मालुम हुआ ताकत नहीं है
इस लिये उसने काम छोड़ दिया घर में बेटा बहू हैं |
थोड़ी शांति महसूस हुई
चलो अपने घर में तो है |
आजकल जो ले पाता है उसे
मिलता है वृद्धावस्था भत्ता या विधवा भत्ता |
आखिर वो कौन सी आग थी
जो उसे एक मील दूर से आ कर कमाने को प्रेरित करती थी |
मन में उठा एक प्रश्न और
अब कैसा महसूस करती होगी आश्रित होने पर वो |
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