1
राख
तले चिंगारी को
हवा न दो उपहास की
भड़केगी
तो जल जाओगे |
2
वर्षों दमन किये
आज क्यों तिलमिलाए
हम क्या इंसान नहीं |
3
निर्भर रहे
तुम हम पे सदा
फिर
यह वहशीपन क्यों ?
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