मंगलवार, 24 जुलाई 2012

क्षणिकाएं - 2

              1                      


राख तले चिंगारी को
हवा दो उपहास की
भड़केगी तो जल जाओगे |
      2
वर्षों दमन किये
आज क्यों तिलमिलाए
हम क्या इंसान नहीं |
      3
निर्भर रहे
तुम हम पे सदा
फिर यह वहशीपन क्यों ?
    

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