अपनों का पढ़ाया पाठ
पिता ,भाई ,पति को प्यार करने का
उनकी गलतियों को
क्षमा करने का भुलाए नहीं भूल पाती वो |
निज को प्यार
करना
सम्मान देना
खुद रास्ता
तलाश करना
उस अबोध लडकी
ने सीखा ही नहीं |
जिंदगी से इन
अपनों के निकलते ही
समाज से कटी
गीली लकड़ी की तरह
वो सुलगने
लगती है |
आज लकडियां
सुलग रही हैं
समाज में धुँआ छाया है
उस दमघोटू अँधेरे में
प्रगति पथ ढूंढ रहे हैं हम |
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