गुरुवार, 4 सितंबर 2014

मिट जायेगी औलाद


03 September 2014
07:43
-इंदु बाला सिंह

कभी न कूटना

अपनी औलाद के सपने

अपनी ढेकी में

क्योंकि

ढेकी से निकला वह चावल

तेरे किसी काम का नहीं होगा

खो कर अपने सपने तेरी ढेकी में

मिट जायेगी तेरी औलाद

सहोदर का अपमान


03 September 2014
07:20
-इंदु बाला सिंह

माँ के पीछे छिप बाण चलानेवाले
मेरे सामने आने से
क्यूं डरते हो
बाहर निकलने की राह में मेरी
ताला मार चल दिये तुम
पकड़ा चाभी माँ को
यह कह कर ......
नहीं खोलना उसके निकासी मार्ग का दरवाजा
पर
मैं तो निकलती रही
पीछे के दरवाजे से बाहर
अपना दैनिक कार्य करती रही
कैसी दीक्षा दी थी तुमने
मुझे अपमानित कर के तृप्त होने की मेरे सहोदर को
ओ मेरे पिताश्री |

कलेजा


03 September 2014
07:07
-इंदु बाला सिंह

वह मौन थी
और
घर का मालिक
चटखारे ले ले के खा रहा था खाना ....
आहा !
आज तो सब्जी बड़ी स्वादिष्ट बनी है
वह आश्चर्यचकित रह गयी
सुन के प्रशंसा के बोल
याद आया उसे
अरे !
आज तो उसका कलेजा टूट टूट के गिरा था खाने में
ओहो !
ये कलेजा भी गजब की चीज होती है
जब तक सासें चलती रहती हैं
तब तक इसमें स्वत: मजबूत बन जाने का गुण मौजूद रहता है |

सफलता मिलेगी


03 September 2014
06:56
-इंदु बाला सिंह

कब तक छुपी रहेगी सफलता

ठोंको उसके हर दरवाजे

नहीं खुलता है दरवाजा

तोड़ दो

उसे घूंसे से

पा जाओगे तुम

सफलता

सफलता का मिलना

हर एक व्यक्ति का हक है |

बरगद के तले बचपन


02 September 2014
13:30
-इंदु बाला सिंह

अब अभाव है
जगह का शहर में
एक से एक गगनचुंबी इमारते बन रही हैं
शहर की जनसंख्या बढ़ रही है
विदेशी आ रहे है
कम्पनियां खुलेंगी
शहर का सौन्दर्यीकरण हो रहा है
बरगद कट रहे हैं
और
सुरक्षित रखा जा रहा है उन्हें
मानव सरंक्षित जंगलों में
अब कोई बटोही नहीं सुस्ताता बरगद के नीचे
जानवर सुस्ताते हैं
स्कूल से पढ़ कर लौटा बच्चा
जब
बरगद के बारे में पूछता है
तो पल भर के लिये हमारी आंखें चमक जाती हैं
हम वीडियो में
बरगद के नीचे खेलता अपना बचपन दिखाते हैं उसे 
आश्वासन देते हैं
आनेवाली छुट्टियों में

बरगद दिखाने का |

मुन्ना फौलाद बन गया


02 September 2014
09:53
-इंदु बाला सिंह

माँ तो माँ होती है

बाकी माएं तो माँ सरीखी होती हैं

कुछ भी कर सकती हैं

जिस दिन यह दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ मुन्ने को

उसी दिन मुन्ना बड़ा हो गया

भीड़ में अकेला हो गया

और

वह फौलाद बन गया |

माँ का सपना


02 September 2014
09:10
-इंदु बाला सिंह

क्या अम्मा !
आखिर तू कितना पढ़ीं है ये तो बता
भला क्यूँ पढ़ने को डांटती है तू मुझे हर दिन
मुझे न भाती ये किताबें
बड़ा मजा आये मुझे
तेरे संग कपड़ा धोने में .......
सजल नयनों से
गले लगाया माँ ने
अपने चार वर्षीय पुत्र को .....
ना बेटा ना
मेरा बेटा
बड़ा बनेगा
साहब जैसे प्लेन में उड़ेगा
ले के मुझको एक दिन |