रविवार, 12 जनवरी 2014

प्रयास का नशा

अच्छा लगता है
खुद ही अपने इर्द गिर्द खींचना
एक गोलाकार
नैतिकता की रेखा
पर
जब समानता की ध्वजा लिए
चलना  चाहते हैं हम
तब बेहतर होता है चुप चाप चलना
शान शौकत के कोहरे 
को चीरते हुए दृढ कदमों से आगे बढ़ते रहना
प्रयास के नशे में डूबे रहना .....
कभी न कभी तो बराबर होंगे
हम तुम
टकराएगी तलवारें
और जीतनेवाला पूछेगा ......
बोल बहादुर !

तेरे साथ  कैसा सलूक किया जाय |

शनिवार, 11 जनवरी 2014

आदमी और कम्प्यूटर

बस 
यूँ ही जुड़े रहेगा आदमी 
कम्प्यूटर से 
कभी लिखेगा 
कभी पढ़ेगा 
फिर थक जायेगा 
और एक झपकी ले लेगा 
फिर आधी रात को 
उठ बैठेगा देखने 
शायद कोई जरूर जाग रहा हो 
कम्प्यूटर का स्क्रीन में
ठीक वैसे ही
जैसे कोई पड़ोस की खिड़की में हो |

गर्व भरा है अस्तित्व

अरे !
कोई तो हाथ बढ़ाएगा पहले 
मित्रता के लिए 
चाहे मैं 
या पहले तू 
यह मेरा गर्व बोले 
तू ही तो आया था 
मेरे द्वारे 
बन याचक साथ का
गुरु भी उतना ही अकेला
जितना है शिष्य
शिष्य न रहे तो पुस्तकें
जल जायेंगी
समय की आग में |

ट्रेन के इंतजार में

पल भर में

ट्रेन आगे बढ़ चलती है
जन्मदाता
प्लेटफार्म पर खड़े रह जाते हैं .......
हर प्लेटफार्म में  बेंचों पर बैठे
ऐसे अनेक मिलेंगे हमें
अपनी ट्रेन के इंतजार में
ये यात्री
आपस में सुख दुःख बांटते
अपने से लगने लगते हैं |

व्यंग्यकार ?

व्यंग्यकार पगला कहलाता है 
अनजानों की बस्ती में 
बेहतर है 
वह अपने सरीखों से ही घिरा रहे 
या फिर वह छपे पुस्तकों में 
और उसे समझाने के लिए 
तलाश कर रखें हम 
एक काबिल शिक्षक 
विद्यालय में 
वर्ना सारे विद्यार्थी पागल बन जायेंगे |

सोमवार, 6 जनवरी 2014

आह झाड़ू ! वाह झाड़ू

टी० वी ० पे देख महिमा झाड़ू की
मेरे बिटवा का मन हरसाया
झाड़ू कंधे पर रख करे वो करे कदम ताल
और फिर करे
दांये बांये थम्म
मैं खोजूं झाड़ू इधर उधर
कभी मिले बिटवा के पलंग के नीचे
तो कभी उसकी अलमारी के पीछे
देख उसका झाड़ू प्रेम
एक दिन कहा मैंने ....
दुकान से झाड़ू खरीद कर ला
बड़ा छोटा हो गया है झाड़ू ......
कभी झाड़ू हाथ में ले कर सड़क पर चलने वाला
झट हो गया तैयार
आधा घंटे में लौटा वह
झाड़ू ले कर
सफाई देते हुए मेरा बिटवा बोल उठा ......
राह में मिल गया था न एक मित्र
वह पूछने लगा था ट्यूशन के बारे मे
इसीलिये देरी हो गयी माँ ....

मफलर और फुट पाथ

हाय रे !
मफलर अब न मिले
फूट पाथ पे  
मैं कहाँ से खरीदूं इसे
बड़ी जोर की ठंड है
बड़ी दुकान में जाने की हिम्मत नहीं
ठंड आंख दिखाए
कैसे अब  खाना बनाऊँ
रजाई मन भावे
कैसे आफिस जाऊं
राह में कोहरा
राह रोके
चहुँ ओर कोहरा ही कोहरा
मन में भी
कोहरा ही कोहरा
कोई तो बेचो
मफलर फुट पाथ पे |