गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

बेटी ही घर है



#इन्दु_बाला_सिंह


जीवन की भागदौड़ में 


बेटियाँ 


ठहराव होती हैं 


बरगद की छाँव होती हैं 


उनकी आँखों में हमें  नया समय दिखता है 


आशा दिखती है 


कल्पना की उड़ान दिखती है ……


पारियों की परिकथाओं सी होती हैं बेटियाँ 


बहन सी श्रद्धा और माँ सी असीस होती हैं बेटियाँ 


बेटी का अपमान


ख़ुद का आत्महन्त है 


बिन बेटी घर सूना । 


11/10/24



बुधवार, 9 अक्टूबर 2024

पिता की तलाश

 


#इन्दु_बाला_सिंह


बचपन में पिता खोई बच्ची ने माँ का संघर्ष देखा 


माँ की  बीमारी में उसका अकेलापन देखा 


सबकी माँ के दुःख के पल में पिता खड़े रहते हैं सहारा बन कर 


पर 


इस छोटी बच्ची को ख़ुद अपनी माँ का सहारा बनना पड़ा 


माँ और बेटी दोनों एक दूसरे के सहायक थे 


लड़की को कसरत करते समय राजनीतिक मित्रों का सहारा लेना पड़ा 


पिता तो पिता होता है 


पिता तलाशती है लड़की विभिन्न पुरुषों में 


कभी कभी वह आजीवन पिता तलाशती रह जाती है ।


08/10/24



प्रश्न करो

#part_2_poem




#इन्दु_बाला_सिंह


कब तक और कितनी औरतें मौन रहेंगी 


परिवार की सुख सुविधा के लिये मिटती जातीं हैं 


एक पीढ़ी के पीछे दूसरी पीढ़ी संस्कार के नाम पर 


रिश्तों की तंग गलियों में घुटती हैं 


कभी सुरक्षा के नाम पर मौन की जातीं हैं 


तो कभी परिवार की इज्जत के नाम पे 


पिता हक़ दो बेटी का 


बेटी को शक्ति दो 


उसे प्रश्न पूछने लायक़ बनाओ 


जिससे वह आजीवन 


सवाल करना न छोड़े


ओ औरत !


तुम्हारे सवाल तुम्हारी आजादी की नींव हैं 


तुम अपने सामनेवाले को आईना दिखा सकती हो 


देश आज़ाद सवालों से हुआ 


अपने हक़ के लिये सभी प्रश्न उठाये और लड़े 


लड़ो लड़कियों लड़ो 


ओरतो लड़ो 


अपनी अस्मिता के लिये नागरिक अधिकार के लिये लड़ो ।


09/10/24



सोमवार, 7 अक्टूबर 2024

बेकारी हटाना था



 


#इन्दु_बाला_सिंह


बेकारी बढ़ गयी थी 


हर वर्ग में आक्रोश था 


नेताओं  को कुछ करना था 


उन्हें अपने पद की चिंता थी 


मुनादी हुयी -


सत्यवादी अल्पसंख्यक हो गये हैं 


उनके लिये दस प्रतिशत कोटे की व्यवस्था की गयी है ।


सभी अपने अपने को सत्यवादी कहने लगे 


सत्यवादिता के  सर्टिफिकेट पर कलक्टर मुहर लगाने का जिम्मा सौंपा  गया 


कलक्टर सरकारी अधिकारी था 


वैसे जज को भी पावर दिया गया था सर्टिफिकेट पर मुहर लगाने का 


लंबी लाइन लगने लगी 


सत्यवादिता के सर्टिफिकेट बनवाने  के लिये


नौकरी का आरक्षण प्रलोभनकारी था 


धर्म , जाति और महिलाओं का आरक्षण ख़त्म हो चुका था 


सरकारी नौकरी घट गयी थी 


ऐसे में सत्यवादिता का आरक्षण बड़े  काम की चीज थी 


आम जनता को शांत करने के लिये 


अब लोग नारे लगाना भूल गये ।



रविवार, 6 अक्टूबर 2024

महादलित



#इन्दु_बाला_सिंह


वृद्धाश्रम में हैं औरतें 


वे अकेली कैसे रहें 


मर्द होता 


तो रह ही लेता अकेला 


अपने घर में भी डर है औरतों को 


बेटी के जन्मते ही 


उसके भविष्य की चिंता करने लगते हैं पिता 


बेटी से घर है 


पर 


बेटी सुरक्षित नहीं 


कितना भी पढ़ लिख ले बेटी 


सुरक्षा सदा एक मुद्दा रहा है पिता के लिये 


ब्याह कर बेटी का 


उसे  सुरक्षित घर में पहुँचाते है वे 


आगे भवितव्यता पर निर्भर है 


देह व्यापार में तृप्त करतीं हैं बहुतों को औरतें 


अरे!


औरतें सरकारी पदों पर हैं 


कॉर्पोरेट सेक्टर में हैं 


स्पेस में जा रही हैं 


पर्वतारोहण कर रही हैं ….…


कितनी प्रतिष्ठित पदों पर हैं वे 


पूजी जातीं है वे नवरात्रि में 


फिर 


कैसे लोग कहते हैं -


दलितों में महा दलित हैं महिलायें 


घरों की खिड़कियों से अंदर झांकने का दम भला कैसे हो ।



शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2024

पेंशनहीन



#इन्दु_बाला_सिंह


सतत भाग्य से लड़ते रहे 


समय कटता रहा  


अस्तित्व की लड़ाई जारी रही 


गुमनाम ही रह गये 


बुद्धिहीन कहलाते रहे 


सकून की तलाश में भटकते रहे 


घर ही न था 


तो चिराग़ भी न बन सके 


चौहत्तर के हो गये 


बस पेंशनहीन जीवन जीते रहे 


भटकते रहे हम ।



कुलांगार



#इन्दु_बाला_सिंह


ऊँची जाति 


ऊँची डिग्री 


एकाएक धन का आगमन 


जन्माता है अहंकार 


इंसान में 


आसपास के लोग उसे कीड़े मकोड़े लगने लगते हैं 


एक निरंकुशता सी जन्म लेने लगती है 


उस के मन में 


धीरे धीरे 


उसका पतन शुरू होने लगता है .…


कभी कभी   कुलांगार भी जन्म ले लेता है


किसी  सौम्य उच्च वर्ग परिवार में ।