शनिवार, 1 नवंबर 2014

नहीं देंगे मकान


29 October 2014
11:46
-इंदु बाला सिंह

खाली पड़े आउट हॉउस को
वे
दिखाते हर सप्ताह
एक नये परिवार को
और
कुछ दिन बाद कहते .....
नहीं देंगे
भाड़े पर मकान
ऐसे राजनीतिज्ञ 
कब होंगे बेघर
सोंच में है
आज डूबा मन
कब चूर होगा अहंकार
सुना था
रावण का भी अहंकार चूर हुआ था |

मैनेजमेंट की पढायी


29 October 2014
10:15
-इंदु बाला सिंह

अब क्या पढूं
बहुत सोंच विचारा के
गृहणी ने
ले लिया दाखिला एम ० बी० ए० में 
अरे !
अब पूछना
क्यों ?
अरे भाई !
नौकरी नहीं करना है उसे
तो क्या हुआ 
पड़ोस में धाक तो रहेगी
रिश्ते मैनेज होंगे
मुहल्ला मैनेज होगा  |

यायावर


29 October 2014
08:14
-इंदु बाला सिंह

कुछ पत्थर सड़क पे हैं
कुछ जंगलों में
कुछ हवेलियों में
कुछ हैं मन्दिरों में
जुबान देते हैं हम उन्हें
बातें करते  हैं
हम भटकते हैं
राम नहीं हैं हम
यायावर सरीखे
आज यहां हैं
कल
न जाने कहाँ
पर दे जाते हैं हम
कुछ पत्थरों को जुबाँ |

छोटी बहन चाहिये


29 October 2014
07:47
-इंदु बाला सिंह

हर घर में
हर फिल्म में
बहन का छोटा होना जरूरी है
तभी तो
घर में मिठास घुलेगी  |

श्रमिक की आशा


29 October 2014
07:24
-इंदु बाला सिंह

श्रमिक की
रोटी और बेटी
बड़ी कीमती होती
तभी तो
वह खबर बनती
उछाल मारता अख़बार
छाप के उन्हें
कमाते हम उन खबरों से
पर
श्रमिक भर आशा आँखों में
सोते और जागते |

आखिर कब तक


28 October 2014
07:06
-इंदु बाला सिंह

सभ्य हुआ इंसान
और
उसने स्वछन्द अस्तित्व वाली स्त्री जाति को
अपनी सम्पत्ति मान
प्यार से
सुख सुविधा सुरक्षा के नाम पर
अपने बाड़े में रख
दे दिया
रिश्तों का नाम
अब
सुधार रहा है
वह
स्त्री जाति को
आरक्षण का नाम दे के
आखिर  कितने आरक्षण देंगे हम
कालेजों , आफिसों में
कितना अद्भुत है
फीस माफ़ करते हैं हम
कालेजों में
लडकियों की
पर
प्रोमोशन के नाम पे
ग्लास सीलिंग लगाते हैं हम
महिला आकाश में
और
अपना दिन भर का आक्रोश
निकालते हैं 
हम
घर में टंगी बालू की बोरी पर
आखिर कब तक |

तीसरा दर्जा


27 October 2014
06:21
-इंदु बाला सिंह

तीसरा दर्जा
नहीं है ट्रेन में
अब
कौन बोलता है यह
है न ट्रेन की जनरल बोगी
एक तीसरा दर्जा
जिसमें
हम चलते हैं
तीसरे दर्जे के इन्सान
माल सरीखे
ठुंसे हुये
घर में भी है
तीसरा दर्जा परित्यक्त अपनों का
आफिस में है
तीसरे दर्जे के कर्मचारियों का
कक्षा में है
थर्ड स्थान पाने वाले छात्र का
जो पाता है पारितोषिक
विद्यालय के वार्षिकोत्सव में
मैट्रिक परीक्षा में
थर्ड डिवीजन पास करनेवाले
शान से कहते  हैं
हम मैट्रिक पास हैं भाई
तुम्हारी तरह अनपढ़ नहीं 
हर स्थान में है
तीसरा दर्जा
तीसरे दर्जे का भी ताव है
क्योकि
हर विद्रोह की नींव पड़ती है
तीसरे दर्जे में ही
और
तख्ता पलटता है
यह तीसरा दर्जा ही |