मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014

और न बंटेंगे हम


22 September 2014
21:45
-इंदु बाला सिंह

कितना बंटना है
जाति धर्म लिंग के आधार पर
मिल कर
मन जीत कर रहना सीखो यार
स्कूल अलग
कालेज अलग
टेक्निकल कालेज अलग
मेडिकल कालेज अलग
एडमिशन में आरक्षण
नौकरी में आरक्षण
प्रोमोशन में आरक्षण
कितना कटोगे
कितना बंटोगे
कांच सा टकरा कर
चूर हो जाओगे
एक दिन
भला एक वृक्ष के
फल , फूल , पत्ता , तना , जड़ अलग रह सके हैं
मन से बोलो आज
और
न बंटेंगे हम |


ओ कन्या !


22 September 2014
14:29
-इंदु बाला सिंह


तेरी शक्ति अपरिमित

तुझसे कांपे जग सारा सदा

मेरी शान तू |

इन्द्रधनुषी रंग


21 September 2014
20:42
-इंदु बाला सिंह

घर में
नाना की मौत के बाद
सब ने
आपस में
अपनी अपनी पसंद के रंग
बांट लिये
किसी को हरा मिला
तो
किसी को लाल
एक ने नारंगी ले लिया
सब ने मिल कर मुझसे कहा ....
सफेद रंग बचा है
नानी उसे तुम ले लो
और
मैं सोंचने लगी
और भी तो रंग थे
वे सब कहाँ गये
पर
मुझे तो इन्द्रधनुषी रंग चाहिये था
और
मेरी इच्छाओं को
न तो किसी ने 
जानना चाहा था
और
न ही पूछना |



हाई वे


21 September 2014
18:46
-इंदु बाला सिंह

हाई वे भी
भला कितनों का नाम याद रखे 
न जाने किस चाह में
बार बार जन्म लेते हैं लोग 
और
रोशनी में रह कर भी
भरे पूरे सम्मान पा कर भी
भला कैसे
अंधेरे में गुम जाते हैं लोग  |

अद्भुत प्यास


21 September 2014
18:35
-इंदु बाला सिंह

ये कैसी अद्भुत प्यास लिये आते हैं हम
तेरा घर सजाते
बसाते
तेरी बाँहों में मुस्काते
गुजर जाते हैं हम
मन में
अपने इक घर की आस लिये |

हम कुत्ता पालते है


21 September 2014
17:59
-इंदु बाला सिंह

नसीबोंवाला होता है
वह
जिसके घर में खिलखिलाती है प्रकृति
वरना
किसे फुर्सत है फूल लगाने की
आज
स्वार्थ में डूबे हम
कुत्ता पालते हैं साथ के लिये
यह जानते हुए भी
कि
कुत्ते का दिमाग बच्चे सा होता है
और
अपनी सुरक्षा के लिये
भोजन के लिये
हमारे न रहने पर
हमारा पालतू
हमारे इन्तजार में
त्याग देगा अपने प्राण |



अपनों की चाह


21 September 2014
17:39
-इंदु बाला सिंह

अपनों की आंखो की चाह
हमें खींचती चली जाती है
और
बस हम यूं ही
निरुद्देश्य से जीते चले जाते हैं
अपने लिए नहीं
औरों के लिये
अपनी पीठ स्वयं ठोंकते हुये ........
देख ! तेरी जरूरत है
औरों को
........

शायद यही जीवन है |