1990
सुख बांटने
को जी चाहता है
और दुःख
दफनाने को
पर
क्या करूं दोस्तों !
इस बंजर भूमि
में
खुद ही हैरान
हूँ मैं आज
अपनी बनाई
हुयी कब्र देख कर
कहीं सूख की
तलाश में
खुद ही कब्र न
बन जाऊं एक दिन |My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.