सोमवार, 3 फ़रवरी 2025

पंखहीन

 


- इंदु बाला सिंह 


बच्चे 


बड़े हुये 


पाँखें निकलीं 


और 


वे उड़ चले 


अपनी मनपसंद दुनियां की ओर    ..... 


अब लौटेंगे वे 


अपनी पैतृक सम्पत्ति लेने 


आज मोह के धागे टूट गये   ..... 


मात्र लगड़ी   .... पंख हीन संतान  फुदकती रही |

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