बुधवार, 26 सितंबर 2018

ग्लोबलाइजेशन

- इंदु बाला सिंह

गाते थे हम ..

रंग बिरंगा ये देश है मेरा

है इसकी .... भिन्न भिन्न  बोली ।

अब गाते हैं हम ...

रंग बिरंगी ये दुनिया है मेरी

भिन्न भिन्न है इसकी बोली और भिन्न भिन्न हैं देश हमारे ।

हम एक हैं

हम धरती की संतान हैं  ।



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