समस्याएं मुझे छलती रही
इन पत्थरों पर पैर रख मैं ऊपर उठती गयी
राह के दलदल में फंसने से बचती गयी ....
इनकी लौ में मेरी अज्ञानता का अंधियारा सिमटता गया
निकटस्थ के फंदे कटते गये .....
समस्याओं ने मुझमें जीने का जज्बा पैदा किया ।
इन पत्थरों पर पैर रख मैं ऊपर उठती गयी
राह के दलदल में फंसने से बचती गयी ....
इनकी लौ में मेरी अज्ञानता का अंधियारा सिमटता गया
निकटस्थ के फंदे कटते गये .....
समस्याओं ने मुझमें जीने का जज्बा पैदा किया ।
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