16
October 2015
08:11
-इंदु बाला
सिंह
एक के पीछे
एक चलती भेड़ें
जो बिदक गयीं
उन्होंने
बसा ली अपनी बस्ती ..........
आज
बिदकी भेड़ों
के पोते पोतियां
सुनती हैं
....पढती हैं उत्सुकता से
अपनी नानियों
और
परनानियों की
भेड़चाल की कहानियां |
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