गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015

अब उकता गये हैं


15 October 2015
12:12

-इंदु बाला सिंह

जाल बुनने में मजा आया ...........
सोये थे
हम
रेशमी जाल में
अब उकता गये हैं .........
जाने का वक्त आ रहा है पास
यूं महसूस होने लगा है ..............
लो
अब हम काटने लगे हैं
आशा का हर रेशमी धागा |

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