27
October 2015
09:04
-इंदु बाला
सिंह
न
जाने किस मिठास की चाहत लिये
गुजरते रहे
महसूसते रहे
जीते
रहे खट्टे अनुभव .........
खड़े रहे
देखते रहे
मुंह फेरते रिश्ते
गजब के पत्थर
थे हम
जो
इन्तजार करता
रहा
जौहरी का
अपनी
नियति का |
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