बुधवार, 30 सितंबर 2015

आत्ममुग्धा



-इंदु बाला सिंह 


लेखक नहीं हूं मैं 
पर 
लिखती हूं 
पाठक नहीं हूं मैं
पर  
पढ़ती हूं अपनी रचनाएं 
आलोचक नहीं हूं मै
पर 
आलोचना करती हूं खुद के वर्णित चरित्रों की 
रचना के भावों की 
मुग्धा हूं  मैं
अपनी रचना की |

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