सोमवार, 28 सितंबर 2015

अनूठे लेखक


- इंदु बाला सिंह


ओ लेखक !
ओ गजब के  दूरदर्शी हरिशंकर परसाई और प्रेमचंद  !
स्वर्ग में बैठ मुस्काते
तुम हम पर
तुम सरीखे  न कोई आज मेरी धरती पर
भला क्यों ?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें