बेटा मेरा है
उसका परिवार मेरा है
वो
क्यों खर्च करता है अपनी ब्याहता बहन पर
समझना चाहिए उसे
बहन अब दूसरे घर की सदस्य है
अपने सुख दुःख बहन को खुद झेलना है ।
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बेटा मेरा है
उसका परिवार मेरा है
वो
क्यों खर्च करता है अपनी ब्याहता बहन पर
समझना चाहिए उसे
बहन अब दूसरे घर की सदस्य है
अपने सुख दुःख बहन को खुद झेलना है ।
ससुराल अपना है
मैके के प्रति कर्तव्य बोध है
कर्तव्य बोध लिए जीवित रहे
मैंका मिट गया
यह कैसा बोध था
जो
सदा तड़पता रहा .....
अज्ञानी ही भले थे ।
Date 5 फरवरी 2025
ओ री लड़की !
कहाँ से सीखा भूलना जड़ें …
अज्ञानता अपना संविधान की ....
पैरासाइट बनना …
अपने मर्द के मिट्टी में मिलते ही
एक दिन
तू अपनी पहचान खो देगी ।
आपका नाम ले कर पुकारने लगे
जब आपकी औलाद
तब
समझ लीजिये
वह
अब आपके रिश्ते को नहीं मान देता
निकल पड़ इंसान
अब इस घर को तेरी ज़रूरत न रही
लौट अब
अपने जन्मस्थान की ओर
क्यों पुकारती तू
ईश्वर मूर्ति में नहीं है
मंदिर में नहीं है
वह
तुझमें है
मान रख अपना ।