मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024

उम्रदार बच्चा



#इन्दु_बाला_सिंह


दादी कहती थी 


देख मैं पानी में डुबो रोटी खाती हूँ 


मैं मुँह बिदोरती थी ……


आज 


अपनी दादी से ज़्यादा उमर की हूँ 


रोटी को पानी में डुबोने की ज़रूरत नहीं मुझे 


सूखी रोटी ही मीठी लगती है


बिस्कुट से ज़्यादा भाती है मुझे यह रोटी ।


24/10/24



प्रगति हो रही है



#इन्दु_बाला_सिंह


जंगलों को शहर निगल रहे हैं 


और 


शहर को महानगर 


इंसान को सुविधा दे रही है स्मार्ट सिटी 


पर्यावरण तो राजनीतिक मुद्दे हैं 


हम ए० सी० रूम , कार , ऑफिस , मॉल में  निश्चिंत है 


हमारी संवाद हीनता बढ़ रही है 


गाँव ख़ाली हो रहे हैं 


रिश्तों की गर्माहट तलाशता मन भटक रहा है 


संयुक्त परिवार छोटा परिवार बन गया  


एकल परिवार का जादू


 तो 


सर पर चढ़ रहा है 


हम प्रगति के कर रहे हैं ।


22/10/24



देर में समझ आई



#इन्दु_बाला_सिंह


लिंगभेद मिटाते मिटाते 


बड़ी देर में 


समझ आई ……


लड़की मतलब बच्चेदानी और सेविका 


इन्हीं दो गुणों के सहारे निकलती है हंसते रोते 


 उसकी ज़िंदगी .…


बाक़ी सब राजनीति है 


क़िस्मत है 


पिता की समझदारी है ।


23/10/24



ये मेरी देहरी है



#इन्दु_बाला_सिंह


जहां भी रहूँगी 


आऊँगी मैं दीया रखने 


अपनी देहरी पर 


तू नहीं रोक सकता मुझे 


ये मेरी नींव है 


इस नींव में मेरी  आत्मा बसती है 


सदा बारूँगी दीया मैं


न भी रही 


तो 


सदा बरूँगी मैं दीया बन अपनी देहरी पर 


तृप्त होने पर ही  जाऊँगी


 मैं 


अपनी देहरी से ।


21/10/24


पिता की असहायता



#इन्दु_बाला_सिंह


पेशाबदानी दे दे बेटा 


नंग धड़धड़ंग पिता ने मनुहार की थी 


नहीं तो पेशाब बिस्तर पर हो जायेगा 


आ कर तुम्हारा भाई ग़ुस्सा करेगा 


पीठ में घाव था 


शरीर असक्त था 


वे उठ नहीं पा रहे थे 


बेटी माँ बन गयी थी इस पल


पर 


बेटा पिता नहीं बन पाया था 


बेटी ने पेशबदानी पिता को पकड़ा दी 


रात भर सोते नहीं थे पिता 


चादर को चुन्नट करते रहते थे 


बेटी दुःखी रहती थी 


अपने आजीवन सहारा रहे पिता के अंतिम महीनों की असहायता देख कर 


वह तो स्वयं पिता पर  मानसिक तौर पर निर्भर थी 


राशन मँगवाना से ले कर 


बिजली बिल भरवाना 


होल्डिंग टैक्स देना 


बिस्तर पर लेटे पिता 


अपनी आँखों के सामने करवाते थे पिता 


उस दिन बेटे को चिंघाड़ कर आवाज़ लगाये पिता अस्पताल के बेड पर 


बेटा पास न था 


पास में था केवल अटेंडेंट 


 एक हिचकी आई 


खून का थक्का निकला 


और प्राण भी निकला ।


18/10/24



मौतें



#इन्दु_बाला_सिंह


आठ साल की उम्र में 


छः महीने की बहन गुजर गयी डिप्थीरिया से 


पति गुजर गये 


हार्ट अटैक से 


पिता गुजर गये 


बीमारी से 


माँ गुजर गयी 


बुढ़ापे और अकेलेपन के दुःख से 


ससुर गुजरे कैंसर से 


सास गुजरी 


हार्ट अटैक से 


कभी न  रोयी वह 


मुझे ख़ुद पर आश्चर्य होता है 


बस 


हर मौत पर  


एक ख़ालीपन और भय सिमट जाता था उसमें 


लगता था मूरत बन गयी है वह 


आज सोंचती हूँ 


ऐसी क्यों थी वह ?


पर रोयी थी वह 


एक बार 


जिस दिन उसकी बेटी 


उसे बिना बताये घर छोड़ कर चली गयी थी 


अपने पुरुष मित्र के साथ   ।


18/10/24



स्वस्थ लड़की

 #part_2_poem



#इन्दु_बाला_सिंह


मातृत्व के नाम पे


सतीत्व के नाम पे 


बलात्कार के नाम पे 


डरना मना है 


जिस दिन कर्म को धर्म समझेगी लड़की 


उस दिन वह मानसिक रूप से 


आज़ाद हो जायेगी 


स्वस्थ हो जायेगी 


और 


समाज स्वस्थ होगा ।


17/10/24