गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

विभिन्न भाषाएं

विभिन्न भाषाओँ में
जब हम हाय हैलो करते हैं
तब
हम शोशल हो जाते हैं
मित्रों से घिरे रह
मुखौटे धारी बने रहते हैं
इसीलिये तो
जितनी भाषाएँ सीखते जाते हैं
उतना ही
हमारा जीना सहज होता जाता है |

बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

भूख का उन्माद

चीखें !!!!
चारों ओर चीखें !!!!!!!
धर्म के नाम पे
स्वदेश के नाम पे
अरे !
सत्य के नाम पे
सहिष्णुता के नाम पे चीखो तो जानूं
इतिहास गवाह है
कितनी नदी बही है
खून की
धर्म के नाम पे
कितनी सभ्यताएं मिटी हैं गरूर के नाम पे
जितनी जोर से चीखेगा दबंग 
और सुनाएगा
अपनी बात
डर से सहम जाएगा सच
ये लो !
ठिठुर रहा है सच
जुड़ी ताप चढ़ा है उसे
कम्बल ओढ़ बैठा है
क्या कंकाल बन जायेगा सच !
भूख भी कितने रूप बदले
स्थान काल पात्र के अनुसार |




पन्ना उड़ गया

मेरी इतिहास की किताब 
का वह पन्ना 
पता नहीं कहाँ आंधी में उड़ गया 
जब उसने कहा ...
हम भी राजपूत हैं 
चौहान हैं 
सच्चा था 
या झूठा था वह 
जो भी था
पर मेरा शानदार पन्ना गुम गया
जब उसने कहा .....
चौकीदार हैं हम
आपका खाना बना देंगे हम ....
अकेले को
घर नहीं देते हम...
सुन
कह क्रूरता से
मेरे मना करने पर भी
वह बोल उठा
ठीक है
मेरी तो शादी नहीं हुयी है
माँ को लाऊंगा
गाँव से
वह आपका खाना बना देगी
आउट हाउस के कमरे की तलाश में आया था
वह
और मैं सोंच रही थी ........
एक राजपूत झाड़ू दे रहा है
दूसरा होटल में बेयरा है
कमा रहा है
पेट भरने को
और
आरक्षण का फायदा
न जाने कौन उठा रहा है ......
पल भर के लिए
राणा का नाम गुम गया
अन्धकार में .......
और मैं ढूंढ रही हूं
अब
धूल भरी राजपूतों की
शानदार किताब
हर पुरानी पुस्तक की दुकान में |

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

दे कर ही जायेंगे

रोते हुए आये थे हम
हंसते हुए जायेंगे
खाली हाथ आये थे 
दे कर ही
कुछ जायेंगे जग को
दानी कर्ण का
दस्तूर निभाएंगे हम
मान रखना चाहो मेरा
तो इतना करना
दूजा कर्ण
न जन्म देना |


सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

नया नेता

भई ! 
हम तो हैरत से देखें तुम्हें 
कितने अनोखे हो तुम 
और विचार करें 
सपने देखें 
अपने आनेवाले कल का |

अति प्रीत

दिन रात
कृष्ण के बाल रूप का पूजन
मोह भंग कर देता है
तुम्हारे प्रति
और फिर
इतने प्यारे बाल मनोहर से भी
भंग होने लगता है मोह
क्यों कि तूम मेरे मानवीय वजूद को
इंकार कर देते हो
तुम उस बाल रूप गान कर 
पुरुष सत्ता को ही
शक्तिवान करते  जाते हो
तेरी अति प्रीत
मुझे न लागे भली |

बसंत कैसे आएगा

पीटा तुमने अपनी  पत्नी को
मैं मौन रहा
पर सहम गयी बिटिया मेरी
डर कर पूछ बैठी .....
क्यों मारा
उस चाचा ने
मेरी चाची को .....
बोलो
भला क्या जवाब दूं ...
मैं ने कहा
बिटिया जरा बुला दो अपनी माँ को ....
और भूल गयी
बिटिया मेरी अपना प्रश्न
पर कब तक भूलेगी
वह उन अनगिनित प्रश्नों को
क्या जवाब दूं मैं
स्त्री शोषण का
नन्ही बिटिया मेरी
कुम्हलाने लगेगी खिलने से पहले
बसंत कैसे आएगा
उसके जीवन में
कौन सा पाठ पढाऊँ मैं उसे
झूठ बोलूं कैसे
झूठ बोल क्या उसे खो न दूंगा मैं !