मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

क्रोध न कर


करे जो मेल !
अभाव में वो उठे
गगन छुए |

क्रोध सुनामी
तट छोड़ वो दौड़े
बिखेरे हमें |

क्रोध से बड़ा
दुश्मन जग में
सम्हलना तू |

क्रोध न कर
हल निकाल ले तू
प्रश्न का आज |

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

उफ्फ ये मन !


मन भटके
बीते कल में देखो
जीए वो पल |

अकेलेपन में
संचय होय शक्ति
चिंता क्यों करे |

खुद सीखा !
अनुभव से सीख
मन पढ़ना |

सफल होगे
जीतोगे दुश्मन को
बुद्धिबल से |

शनिवार, 13 अक्टूबर 2012

गांव की लड़की


बोलते रहिये
हम सुन रहे हैं
लड़के को पढ़ाएंगे
लड़की को कभी न
कौन लड़की की सुरक्षा करेगा
राह में जब छेड़ेंगे लोग
उसकी शादी कैसे होगी भविष्य में
आप अपनी बोलते रहिये
हमें अपने समाज में जीना है
सुख शांति से जीना है
हम गरीब हैं
आप हैं शहरी बाबू
आपके शहर में होगा जरूरी
लड़की का पढ़ना
हमारी लड़कियां  बिना विद्यालय गए
घर में ही चिट्ठी लिखना पढ़ना सीख लेती है
हमारे खेतों में काम मिल जाता है
हमारी लड़कियों को
उन्हें ऑफिस में कॉम करना है क्या ?
हम खुश हैं साहब
आप हमारे बारे में चिंतित  हैं |

बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

छोटी कवितायें - 17



  ये शहर 


शहर में
झूठ के सहारे
पैसे की गर्मी में
कितने करते अपराध
दुर्बल घोषित
सबल
...................
क्या यही शहर है ?
अपनी चकाचौंध से लुभाता
भौतिक सुख सुविधा जुटाता है
हमें ये शहर
किसने मारी इसकी आत्मा
पूछो न जरा 
सरकार से जाकर |


  शरीर की देख भाल 


विज्ञान में
पढ़ लेंगे बच्चे
अपने शरीर की देख भाल
हम निश्चिन्त रहें |
हम ये देखें
शिक्षक क्या व कैसे
पढ़ा रहा है |
शिक्षक लेता है पैसे
पढ़ाने के लिये ही
चौकस रहिये !

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

मोह


रहने के लिये
कष्ट से बनवाये अपने मकान की
एक एक ईंट में
अपनी यादें बसी रहती हैं
जो वक्त के सीमेंट से जुडी रहती हैं
रंग - रोगन , झरोखे से झांकती हैं
हमारी खुशियाँ
रसोईघर से आती खाने की खुशबू
परस कर आई हमारी थाली
हमें तृप्त करती है
सामने पार्क में खेलते बच्चे देख
मन बच्चा बन जाता है
शरीर जोन ज्यों शिथिल होने लगता है
हम महसूस करने लगते हैं
अपनी नश्वरता का
और लगने लगता है
सब यादें , दृश्य यों ही छूट जायेंगे हमसे
सब रहेंगे
हमारी बंधी मुट्ठी खुल जायेगी
जहां मैं बैठा हूँ आज
वहाँ कल कोई और होगा ........
मोह भी क्या चीज है
जब तक जान है
तब तक मोह है
अपने हैं |

रविवार, 7 अक्टूबर 2012

हाइकू - 49


वायु सेना दिवस के उपलक्ष्य में ....


वायुसेना !
जन्म दिन तेरा है !
जोश  हमें  है |

वायु सैनिक
प्रेरणा स्रोत तुम
हम बच्चों के  |

मैं भी मारूंगा
उड़ के दुश्मन को
सेनानी बन |

सुन सेनानी !
सदा विजयी होना
रण क्षेत्र में |


वायु सैनिक
लहराते तिरंगा
जोश बढ़ाते |

चलना चाहूँ
ले के सेना ध्वज
प्लाटून संग |

जोशीला मन
कदम ताल करे
रुक पाए |

छोटी कवितायेँ - 16

         माँ



माँ की दुलारी बेटी
रहने लगी
नानी के पास
पिता से लड़ के
देख सकी थी वो
किसी दूसरी को
अपनी भगवान की प्यारी
माँ का स्थान लेते हुए
पर जिसकी नानी न हो
वो क्या करे ?

  सफेद चाँद  

आज सुबह
सफेद चेहरा था चाँद का
वह आया था
कोहरा ओढ़ कर
भाई सूर्य से मिलने ....
बीमार चाँद को देख
भाई सूर्य ने मुंह फिर लिया
...........
थोड़ी देर खड़ा रहा
फिर दुखी मन से
लौट गया वो |