गुरुवार, 7 मई 2015

मौन से बड़ा न कोई सत्य


06 May 2015
20:03

-इंदु बाला सिंह

ज्यादा इमानदारी पागलपन है 
सुधर जा 
अब भी मौका है 
मौका देख कर खोलना मुंह 
वर्ना 
अकेला हो जायेगा
मौन से बड़ा कोई सत्य है 
जिसने समझ लिया 
वह जी लिया |

मकान का स्वप्न


07 May 2015
09:49


-इंदु बाला सिंह

मकान तो बपौती है
अमीरों की
मर्दों की .............
बेटियां क्या जानें मकान की कहानी
वे तो 
देखती रहती हैं बस दिवास्वप्न
अपनी  जिन्दगी में आनेवले राजकुमार का
जो ले जायेगा उन्हें
अपने मकान में |

मंगलवार, 5 मई 2015

काम का मूलमन्त्र


इमानदारी ही है
काम का मूलमंत्र
मान ले तू
आज |
सपना तेरा
पहुंचायेगा तुझे
सिद्धि के पास |
चाह हूं
मैं तेरी
रहूँ मैं दिल में तेरे
ढूढ़ के देख तो सही |
जीत
हूं मैं तेरी
खोल दे दरवाजा तू
देख ले
भोर है भयी |

सोमवार, 4 मई 2015

हाथ न फैलायें हम कभी


04 May 2015
20:42
-इंदु बाला सिंह


गर स्वाभिमान मिटा
तो
हम लुटे
फिर
ऐसा जीना भी क्या जीना
यारा !
चल
क्यूं कस कर पकड़े
अपनी मुट्ठी में
हम
अपना मान
अपना स्वाभिमान
और
कभी हाथ फैलायें हम
जीते जी अपना
बस
जब तक सांस
तब तक
है आस

सुन ले मेरे यार |

रविवार, 3 मई 2015

जन्मदाता तो हैं बरगद की छाँव

-इंदु बाला सिंह 

रोती सूरत
भाये कुछ लोगों को
महिलाओं की |
भोर गर्मी की
अनुशाषित करे
हम युवा को |
नारी से है घर
समाज की है रीढ़ वह
यह न भूलना कभी तू |
पर
जन्मदाता तो  हैं बरगद की छाँव
इतना याद रखना तू |

बेटी सम्मान तलाशती ही रह जाती है |


03 May 2015
22:13

-इंदु बाला सिंह

बेहतर है
हम बेटी को बेटी ही रहने दें
बेटा कह कर पुकारते हम जब उसे
वंचित रहजाती है वह
कितने ही मधुर पलों से |
आजीवन
बेटे सा श्रम करके भी वह
घर बाहर दोनों ही जगह
अपने लिये
सम्मान तलाशती ही रह जाती है |

शनिवार, 2 मई 2015

भाग्य भरोसे


30 April 2015
21:05

-इंदु बाला सिंह 

भाग्य 
है हथियार कायर का 
पकड़ कर वह उसे  
सोता है सदा  सेज पे 
हो  के निश्चिन्त 
क्योकि 
अब 
है न डर उसे 
जरा भी अपनी हार से |