बुधवार, 4 दिसंबर 2013

शिक्षक एक तपस्वी

बच्चों को समझाते
राह दिखाते
मुस्काते
ऐसे शिक्षक बन गये हम
कि हमेशा राह ही दिखाते रहे
और लोग हमसे कतराते रहे
आदर्शों की पोटली कौन ढोए......
मित्रहीन हम
प्रकाश स्तंभ बने रहे
भटके बच्चों को राह दिखाते रहे
जीवन के हर पड़ाव में
बच्चे आते रहे
हमारे लिए मित्र बने रहे |
छात्रों  का विश्वास
शिक्षक के मन में
दीपक सा जलता रहा
और हम  आजीवन  मुस्कुराते रहे |

सम्बन्धों के मकड़जाल

एक जगह रम जाने से
सम्बन्धों का प्रेम
मकड़जाल बना लेता है
तब घुटने लगता है स्व
और परेशान हो
मन आगे बढ़ निकलता है
भर पूर सांस लेने को
आत्म मुग्धता की अवस्था में
हम पाते हैं
अरे ! ........
कुछ जालों को चिपके हुए
निज तन से
जो निकले ही नहीं
वे सम्बन्ध टूटे नहीं अब तक ....
उस पल एक अजीब सी खुशी अनुभव होती है
लगता है
किसी को  जरूरत हैं हमारी अब भी
और ये जाल  हमसे लिपटे
हमारे मित्र बने रहते हैं
आजीवन साथ रहते हैं
हमसे बातें करते रहते हैं |



अख़बार

अख़बार बताते हैं
बहू ने सास को मारा
पुत्र ने पिता को पैसे के लिए मारा
स्कूल में मिडडे मील खा कर बीमार हुए बच्चे
बैंक के ए०  टी ० एम०  से चोरी हुयी
गरीब पितृहीन लड़की को नौकरी का लालच दे मित्र ने एक लाख में बेच दिया
डाईन के संदेह में गांव वालों ने वृद्धा को मार दिया
इत्यादि इत्यादि ....
जी करता है बंद कर दूं यह क्षेत्रीय अख़बार
जो कि भर देते हैं
जी में नकारात्मक ऊर्जा
कुछ पठनीय लेख
राजनीतिक खबरें
और नौकरी के विज्ञापन रोक देते हैं हाथ हमारा
क्या पता हमारे लायक कोई आकर्षक नौकरी का विज्ञापन हो
और आखिर आते रहते हैं अख़बार घर में
बिछते रहते हैं अलमारी पर
सब्जी के छिलके रख कर फेंकने के काम आते हैं
अनपढ़े अख़बार
और पेड़ कटते रहते हैं
हमारे अख़बार के लिए |

हर सांस एक कहानी

हर सांस एक कहानी है
जिसे लिखवाता पवन जबानी है
कैसे भागूं
घर , वन , सड़क , आफिस
सभी जगह कहानियाँ हैं
कब्रिस्तान भी अछूता नहीं
दिन तारीख  भी अंकित है हर कब्र पर
और उसमें बंद एक उपन्यास है
श्मशान भी तो खाली नहीं
हर पल घटित होती उसमें कहानियाँ हैं
जिन्हें लिखवाता रहता है
पवन मुझसे
जब तक मैं जिन्दा हूँ
कलम चलती रहेगी
लेकिन पवन जब बौरा जायेगा
तब कहानियाँ गड़ जायेंगी जहाँ की तहां
और सिन्धु घाटी  सी एक नई सभ्यता जन्मेगी |

शैतान छात्र

हर शैतान छात्र को
महत्व  दे कर
उसका मन जीता 
उसकी समस्याएं हल किया
और आजीवन इज्जत पाता रहा
वह शिक्षक
छात्र से
और अभिभावक से
शैतान छात्र एक चुनौती होता है
हर शिक्षक के लिए
जिसका सामना करना
उसके  काबिलियत की पहचान होती है |

जाड़े की धूप में बतियाती हैं हम

कितना मजा मिलता है
जब हम घर बैठ कर
बस और सड़क की धक्के खाती
ऑफिस खट कर लौटती औरतों को
चरित्रहीन कह कर उसका मान मर्दन करते हैं
आखिर उसका आदमी कमाऊ हैं
क्यों जाती है वह सड़क पे
और आदमी निकम्मा है तो
ताने देने में और मजा आता है ....
देख न कैसे बन ठन कर निकलती है
जरूर चक्कर होगा कोई .....
बिनब्याही निकलती है सड़क पर
तो बाप भाई के नाम पर कोसते हैं हम
मर्दों के दोष निकाल नहीं सकते
डर लगता है उनसे
कामकाजी घर बाहर से थकी हारी 
न सुहाती हमें
क्यों कि पैसे कमाती है वह .....
अपने बाप भाई को भी तो पैसे भेज देती होगी वो ....
जाड़े की धूप में
कभी किसी के छत पर तो किसी के छत पर
बतियाना आखिर कितना सुखद रहता है
और मस्त रहता है मुहल्ले का रिपोर्ट लेना |

शोषण रुक जायेगा

मालिक और नौकर
मकान - मालिक और किरायेदार
गरीब और अमीर
कभी मित्र नहीं हो सकते
जिस दिन वे ये समझ जायेंगे

उस दिन उनका शोषण रुक जाएगा |