शुक्रवार, 22 मार्च 2013

दुखी इमानदारी

दुखी इमानदारी 
बेईमानी की पोशाक मांग कर पहनी 
घर से निकली सड़क पर घूमने 
बहुत  मित्र मिले राह में 
पर घुटन होने लगी उसे ।

हँसते हँसते

हँसते हँसते हनन किया 
उसने मेरे हक का 
अब सुना है 
वो समाज कल्याण करता फिरता है ।

गुरुवार, 21 मार्च 2013

बंधी गांठ


आंचल के किनारे एक गांठ थी
उस कमजोर गरीब महिला के
सभी महिला बांधी रहती हैं कुछ सिक्के
यह किसी के लिये नयी बात नहीं थी
अजूबी बात तो तब हुई
जब उस महिला के मरणोपरांत
वह गांठ खुली
और
सबकी आंखे चुंधिया गयीं
उसमे हीरे के टुकड़े को देख कर
आजीवन उस औरत ने
उस टुकड़े को लोगों की नजर से बचा कर रखा था
चोरी के भय से
अब वो भयमुक्त थी |

सोमवार, 11 मार्च 2013

आरक्षण ?


खेत है खलिहान है
रहने को बड़ा सा कच्चा घर है
पर पैसा नहीं है
औरतें पास के शहर में घरेलू काम करने चली आती हैं
जूते बर्तन धोना
कमरा साफ करना उन्हें बुरा नहीं लगता
श्रम की कीमत इन महिलाओं के परिवारवालों से हम सीखे
ये मुक्त नारियां हैं
नारी मुक्ति आन्दोलन से इन्हें कोई मतलब नहीं
आरक्षण क्या होता है इन्हें पता नहीं
पर इन्हें इनके बच्चे बताते हैं सरकारी योजना के बारे में
विद्यालय से ज्ञान मिलने पर
ये सरल जमीं से जुड़े लोग हमारे लिये उदाहरण हैं
आखिर क्यों सुविधाभोगी हो रहे हैं हम
ये कौन सी राजनीति चल रही है हमारे इर्द गिर्द
शायद इनके बच्चे पढ़ कर शहरी बन जांय |

छोटी लड़की


भात और कमरा मिल जाय
बस और क्या चाहिए
लड़कियों को
जी लेती हैं वे जीवन सुख से
भला हो उन बड़े लोगों का जिन्होंने बनाये
आउट हॉउस वाले मकान
कमरा उसे ही मिलेगा जो करेगा घर में काम
खाना भी मिलेगा
बस एक छोटी लड़की बन जाती है
सहारा अपने माँ बाप के परिवार का
और बड़े लोगों के परिवार का जरूरत
बड़े लोगों के दिए नए व पुराने कपड़ों में
उसका तन चमकता रहता है
सड़क की भूखी निगाहों से सुरक्षित रहती है
यह लड़की
विद्यालय जाने से
क्या फायदा
बड़े बड़े लोग अपने परिवार के लिये
भात और कमरा जुटाते जुटाते मिट जाते हैं
यही छोटी लड़की एक दिन
उम्र बढ़ने पर
ब्याह के बाद  
दूसरे आउट हॉउस में चली जाती है
जी लेती है
खुश रहती है
यह कामवाली लड़की
अपने घर की धुरी होती है लड़की
बड़े घरों की सहायिका होती है लड़की |

पूजनीय है माँ


पिता का इलाज करवाने
शहर से बाहर के बड़े अस्पताल में दिखाने 
की फुर्सत न थी पुत्र के पास
रिश्तेदारों से मिलने चला आता था 
वह पिता के घर
लोगों को पहचानना भी जरूरी था
पिता की मौत के बाद
चमक गया घर
मकान मालिक बन गया था वह
उसने पिता के समय के किरायेदारों को निकाल दिया
नया राजा अपने ढंग से
राज्य के दर्शनीय स्थल बनवाने लगा
माँ का क्या
वह  एक पूजनीय मुर्ति होती है 

शनिवार, 9 मार्च 2013

वह औरत


हर रात को
उस घर से चीखने चिल्लाने  
जोर जोर से लड़ने की
खाली महिला की आवाज सुनाई देती थी
रास्ते में टहलती दिखती थी
हर रोज वही महिला
जरूर उसका आदमी कुछ ऐसा कहता था होगा कि
क्रुद्ध हो जाती थी वो औरत
लोग मिल कर
समझौता कर के क्यों नही रहते ?
एक दिन देखी वह शाल ओढ़
मुंह नाक ढांप कर घूम रही है
किसी से पता चला
उसे असाध्य बीमारी हो गई है
फिर सुनी वो अब इस दुनिया में नही है
मुक्त हो गई वह
रोज की चख चख से
अशांति से
कभी कभी किसी को प्रतिदिन देखने से
एक अजीब सा नाता जुड़ जाता है
अब देखती हूँ
उस औरत का आदमी
एक नई औरत के साथ दिखता है
सुना है
उसने फिर से शादी कर ली है
उस औरत के मकान  में
शांति  रहती है |