भात और कमरा मिल जाय
बस और क्या
चाहिए
लड़कियों को
जी लेती हैं
वे जीवन सुख से
भला हो उन
बड़े लोगों का जिन्होंने बनाये
आउट हॉउस
वाले मकान
कमरा उसे ही
मिलेगा जो करेगा घर में काम
खाना भी
मिलेगा
बस एक छोटी
लड़की बन जाती है
सहारा अपने
माँ बाप के परिवार का
और बड़े लोगों
के परिवार का जरूरत
बड़े लोगों के
दिए नए व पुराने कपड़ों में
उसका तन
चमकता रहता है
सड़क की भूखी
निगाहों से सुरक्षित रहती है
यह लड़की
विद्यालय
जाने से
क्या फायदा
बड़े बड़े लोग
अपने परिवार के लिये
भात और कमरा
जुटाते जुटाते मिट जाते हैं
यही छोटी
लड़की एक दिन
उम्र
बढ़ने पर
ब्याह के
बाद
दूसरे आउट
हॉउस में चली जाती है
जी लेती है
खुश रहती है
यह कामवाली
लड़की
अपने घर की
धुरी होती है लड़की
बड़े
घरों की सहायिका होती है लड़की |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें