रविवार, 25 नवंबर 2012

कौशल


लड़कियों !
विद्रोह करने का नुस्खा
अपनाईये
सबेरे सो कर उठिए दस बजे
दैनिक कार्य
निपटने के बाद
अपने नाश्ते की चिंता कीजिये
दूसरों की चिंता करेंगी !
मिट जायेंगी
आप |
डर किस बात का
कोई क्या कर लेगा आपका 
आप भविष्य हैं
उनका
वे नाखुश होते हुए भी
मुंह से मीठी मुस्कान
मीठी जुबान भी निकलेंगे
फिर
आपके पास मातृत्व है
अपने कौशल भंजायिये
और
मस्त रहिये |

बुधवार, 21 नवंबर 2012

गाँठ


बचपन
कैसा अबोध होता है
माँ से लड़नेवाला बुरा होता है
और गाँठ पड़ जाती है
मन में
वो भी एक ऐसी गाँठ
जिसे हम कभी नहीं खोल पाते हैं |
उम्र के साथ
समझ बढ़ने पर
उस घटना को हम
जब पुन: महसूसते हैं
तो पाते हैं
एक नयी दृष्टि
पर वह बंधी गाँठ
हमसे नहीं खुल पाती है
शायद
हममें मनोबल का अभाव रहता हो
इस समय काल और दूरी भी
अपनी
मुख्य भूमिका अदा करने लगते हैं
गांठ के न खुलने में |

मंगलवार, 20 नवंबर 2012

कृपा


शुगर टेस्ट में 9.5 है
अब एक समय खाना बन्द
फिर कंट्रोल हो जायेगा
शुगर लेवल 6.5 वापस हो जायेगा
क्या नसीब है !
किसी के पास डाक्टर है दवा है
किसी के पास खाना नहीं है
वाह ! रे न्याय
आजीवन अथक परिश्रम के बाद
मंदिर के सामने बैठ जाते है
बुढ़ापे में  
अपाहिज होने पे दान हेतु
ये कैसी व्यवस्था है ?
अमीर तो जी ही ले रहा है
गरीब आकाश की ओर
ताक रहा है
कृपा हेतु |

शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

बतियाना जरूरी है !


घने कोहरे में
उभरता तेरा अक्श
कोहरे में ही
विलीन हो जाता है
काश !
निकलकर आती वह आकृति
कोहरे से बाहर
और घंटों बतियाती सुख दुःख  |
कितने अकेले हो जाते हैं
हम
इस भागमभाग में
अपनी जुझारू  दिनचर्या में |
क्यों नहीं सीखता इंसान
जीना राह में
एक गंतव्य से दूसरे गंतव्य तक
जाते वक्त |

वो कन्या


दखते ही देखते
कहानी बन गई वो
क्या पता कब आयेगा कोई पाठक
पर आयेगा जरुर
ईंट का काल ज्ञात करने
कोई पुरातत्ववेत्ता
और तब
वह जी उठेगी वह
अपनी कहानी में
फिर से
कक्षा में छात्र पढेंगे उसे
उसका चरित्र विश्लेषण करेंगे
उसे चाहनेवालों की संख्या
अगणित होगी
अहोभाग्य !
उस कन्या का |

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

भक्त जय हो तेरी !


खुद को मिलती थी
रोटी कभी खाने को
आज
गाय को रोटी खिला रहे हैं
आज धनी हो गए हैं
आखिर कैसे
जरुर किसी का दिल तोड़े होंगे
तभी तो
आज
धार्मिक बन
पाप काट रहे हैं
भक्त बने फिर रहे हैं
जय हो !
भगवान तेरे भक्तों की |

पैतृक हुनर



गृह उद्द्योग !
पैतृक उद्योग है
तेरा हुनर
न छोड़ना इसे
!
मेरे प्यारे विद्यार्थी
सदा देगा तुझे
आत्मिक आनन्द
वैभव और समान जीवन में
कहीं भी रह ले
स्वदेश या विदेश
तेरे परिवार की अनुभूति
हर पल तेरे साथ |