गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कोई चाह नहीं


 

 

भूल चुकी

 

मैं तो दुःखद अध्याय जीवन के

 

क्या रखा अब बीते पल में

 

पुराने अपनों में

 

साथ न दिये रक्त संबंधी और रिश्ते

 

अहंकार में डूबे वे

 

ईश्वर की लाठी का प्रकोप भी वे भूल चले

 

चाहूँ मैं अब जीना

 

बिना आकांक्षा के ।

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