शनिवार, 22 अगस्त 2026

बिंदी


 

आज देखती हूँ

 

बड़ी बिंदी लगाती हैं महिलाये

 

यद्यपि उनका साथी गुजर गया है

 

अच्छा लगता है इस परिवर्तन को देख कर

 

और

 

मुझे वह महिला याद आयी

 

जिसने अकेली औरतों को के मान के लिये कभी बिन्दी ही न लगाई

 

वह माँ याद आई

 

जिसने अपने दामाद के गुजरने पर खुद सिंदूर लगाना छोड़ दिया

 

कुछ लड़ाइयाँ अपने तरीके से लड़ते है

 

और

 

कुछ बंधन लड़कियां सहर्ष पसंद करती है

 

ब्याह करना लड़की के शान की बात है न कि जरूरत।

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