कम आमदनी थी
ऑफिस जाने का भाड़ा के लिए
वह अपनी माँ के भगवान के सामने रखे सिक्के चुरा लेती थी
भगवान जी !
मैं अगले महीने तनख्वाह मिलने पर लौटा दूंगी
और
वह हर महीने भगवान की मूर्ति के सामने वापस रख भी देती थी
हर महीने कोई नई जरूरतें पैदा हो जातीं थीं
और
उसे भगवान के सामने रखे पैसे उठाना पड़ता था ।
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