हमारे समाज में मॉब लिंचिंग नहीं होता
मेरी आदिवासी कामवाली ने मुझे समझाया
मेरा बेटा दूसरे समाज की लड़की से ब्याह कर लिया
मैने भोज दिया पूरे समाज को
और
हमारे समाज ने मेरे बेटे बहू को अपना लिया।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
कम आमदनी थी
ऑफिस जाने का भाड़ा के लिए
वह अपनी माँ के भगवान के सामने रखे सिक्के चुरा लेती थी
भगवान जी !
मैं अगले महीने तनख्वाह मिलने पर लौटा दूंगी
और
वह हर महीने भगवान की मूर्ति के सामने वापस रख भी देती थी
हर महीने कोई नई जरूरतें पैदा हो जातीं थीं
और
उसे भगवान के सामने रखे पैसे उठाना पड़ता था ।