-इंदु बाला सिंह
आओ ! सिखायें बेटियों को हम ...
बेटी का फर्ज
बेटी की जिम्मेवारी है .....
उसके जन्मदाता , भाई , बहन
उसका पति और उसके बच्चे
बेटी को स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनना है
क्या पता कोई उसके सपने को अपना सपना मान सतत उसकी नींव बन खड़ा हो
याद रखना है बेटी को उस निकटस्थ मित्र को
और दुश्मनी की चाभी उसे किसी गहरे जल में फेंक देना है
बेटी शक्ति है ..
शान है
करुणा की धारा है .
बेटी को कमजोरी और निर्भरता शब्द निकाल फेंकना है अपनी डिक्शनरी से ...
बेटी जरूरत है
क्योंकि
बहन के बिना भाई अकेला है ।
आओ ! सिखायें बेटियों को हम ...
बेटी का फर्ज
बेटी की जिम्मेवारी है .....
उसके जन्मदाता , भाई , बहन
उसका पति और उसके बच्चे
बेटी को स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनना है
क्या पता कोई उसके सपने को अपना सपना मान सतत उसकी नींव बन खड़ा हो
याद रखना है बेटी को उस निकटस्थ मित्र को
और दुश्मनी की चाभी उसे किसी गहरे जल में फेंक देना है
बेटी शक्ति है ..
शान है
करुणा की धारा है .
बेटी को कमजोरी और निर्भरता शब्द निकाल फेंकना है अपनी डिक्शनरी से ...
बेटी जरूरत है
क्योंकि
बहन के बिना भाई अकेला है ।
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