- इंदु बाला सिंह
मैं कौन हूं
गाहे बगाहे प्रश्न करता है मन ....
मन बाल शिशु सा भौंचक देखता है अगल बगल
सब व्यस्त हैं
कहीं से कोई उत्तर नहीं
धीरे धीरे डूब रहा है मन ...
आखिर मन दौड़ता क्यों नहीं .... मौसम में खिलता क्यों नहीं
मन आखिर इतना जिज्ञासु क्यों है ?
मन क्यूं नहीं खुद तलाशता अपने प्रश्न का उत्तर ?
मन जाड़े में धूप सेंकता भालू बन रहा है ।
मैं कौन हूं
गाहे बगाहे प्रश्न करता है मन ....
मन बाल शिशु सा भौंचक देखता है अगल बगल
सब व्यस्त हैं
कहीं से कोई उत्तर नहीं
धीरे धीरे डूब रहा है मन ...
आखिर मन दौड़ता क्यों नहीं .... मौसम में खिलता क्यों नहीं
मन आखिर इतना जिज्ञासु क्यों है ?
मन क्यूं नहीं खुद तलाशता अपने प्रश्न का उत्तर ?
मन जाड़े में धूप सेंकता भालू बन रहा है ।
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